यह टूल क्या नहीं जानता
योजना चेक का जवाब कहाँ अधूरा रह सकता है, और ऐसे में पक्की बात कहाँ पता करें।
योजना चेक सरकारी रिकॉर्ड से हर योजना के नियम पढ़कर बताता है कि आपके परिवार को कौन-सी योजना मिल सकती है। पर कुछ बातें टूल नहीं जान सकता। ऐसे में जवाब “शायद” रहता है, या कोई योजना दिखती ही नहीं। यह पेज बताता है कि कब ऐसा होता है, और तब पक्की बात कहाँ पता करें।
सरकारी लिस्ट में नाम
कई योजनाएँ आवेदन से नहीं, सरकारी लिस्ट से मिलती हैं: जैसे राशन कार्ड की गिनती, गाँव के मकान की लिस्ट, या किसी सर्वे में नाम। आपका नाम लिस्ट में है या नहीं, यह टूल नहीं देख सकता, क्योंकि हम आधार या कोई नंबर नहीं माँगते। ऐसी योजना पर्ची में “शायद” में आती है। जहाँ नाम देखने का सरकारी पेज हमें मिला, वह उसकी लाइन में लिखा है।
पहले से जुड़े हैं या नहीं
टूल यह नहीं जानता कि आपको कोई योजना पहले से मिल रही है या नहीं। कुछ योजनाओं में नए लोगों का रजिस्ट्रेशन बंद है, पर जो पहले से जुड़े हैं, उन्हें पैसा मिलता रहता है। ऐसी योजना पर्ची में “नए आवेदन बंद” में आती है, और उसका पैसा कुल में नहीं जुड़ता। जहाँ सरकारी पेज पर यह लिखा ही नहीं कि नए आवेदन खुले हैं या नहीं, वहाँ लाइन में यही लिखा होता है।
डॉक्यूमेंट, आधार और बैंक
कई योजनाओं में नियम से हक़दार होने के बाद भी पैसा तभी आता है, जब डॉक्यूमेंट पूरे हों, नाम हर जगह एक जैसा हो, और जहाँ पैसा आधार से जुड़े खाते में आता है, वहाँ आधार सही बैंक खाते से जुड़ा हो। टूल इनमें से कुछ नहीं देख सकता। जहाँ सरकारी रिकॉर्ड में लिखा है, वहाँ योजना की लाइन छूने पर ज़रूरी डॉक्यूमेंट और आवेदन के बाद की बातें दिखती हैं।
जो योजनाएँ हमारे पास नहीं हैं
- टूल में केंद्र की और राज्यों की चुनी हुई योजनाएँ हैं, सारी नहीं। जो योजना हमारे पास नहीं है, उसके बारे में टूल कुछ नहीं कहता। सरकार की वेबसाइट myscheme.gov.in पर हज़ारों योजनाएँ हैं।
- दादरा नगर हवेली और दमन दीव, और लक्षद्वीप की अपनी योजनाएँ अभी टूल में नहीं हैं। इनका सरकारी रिकॉर्ड हम पढ़ नहीं पाए, या उसमें पूरी बात नहीं मिली। वहाँ पर्ची में सिर्फ़ केंद्र की योजनाएँ आती हैं।
- बुढ़ापा, विधवा और दिव्यांग पेंशन में केंद्र का हिस्सा राज्य के ज़रिये आता है, और कई राज्य उसमें अपना पैसा जोड़ते हैं। जिस राज्य की पेंशन का नियम हमारे पास नहीं है, वहाँ टूल सिर्फ़ केंद्र का हिस्सा दिखाता है।
नियम बदलते रहते हैं
हर नियम के साथ वह तारीख़ लिखी है, जिस दिन हमने उसे सरकारी रिकॉर्ड से जाँचा। उसके बाद कोई नया ऑर्डर आया हो, तो जवाब पुराना हो सकता है। जो बदलाव हमें मिले, वे क्या बदला वाले पेज पर तारीख़ के साथ लिखे हैं। कोई बदलाव हमसे छूट गया दिखे, तो ग़लती बताएँ।
आख़िरी फ़ैसला सरकार का
टूल का जवाब अंदाज़ा है। कोई योजना मिलेगी या नहीं, और कितना पैसा मिलेगा, यह वही सरकारी दफ़्तर या वेबसाइट तय करती है, जहाँ आवेदन होता है।