प्रधानमंत्री फ़सल बीमा योजना (PMFBY)
फ़सल ख़राब होने पर बीमा कंपनी क्लेम का पैसा सीधे बैंक खाते में डालती है। कितना कवर मिलेगा, यह राज्य हर फ़सल के लिए तय करता है। किसे: परिवार में कोई किसान जो नोटिफ़ाई की हुई फ़सल उगाता हो; बटाई या किराए पर खेती करने वाले किसान भी चलते हैं।
स्टेटस: चल रही है। PIB की 29 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक़ खरीफ़ 2026 में 25 राज्य और UT इसे चला रहे हैं। बीमा तभी होता है जब राज्य ने आपकी फ़सल और आपका इलाक़ा नोटिफ़ाई किया हो।
आवेदन कब होता है: बीमा सीज़न-सीज़न होता है (ख़रीफ़, रबी)। हर फ़सल में नाम लिखवाने की आख़िरी तारीख़ राज्य तय करता है। गाइडलाइन के मुताबिक़ यह आम तौर पर ख़रीफ़ में 15 जुलाई और रबी में 15 दिसंबर से आगे नहीं होती। इसलिए अपने राज्य, फ़सल और सीज़न की तारीख़ बैंक, CSC या कृषि दफ़्तर से पूछें
क्या मिलता है
फ़सल ख़राब होने पर बीमा कंपनी क्लेम का पैसा सीधे बैंक खाते में डालती है। कितना कवर मिलेगा, यह राज्य हर फ़सल के लिए तय करता है (सोर्स)
किसे मिलती है
ये सारी बातें सही होनी चाहिए:
- परिवार में कोई किसान जो नोटिफ़ाई की हुई फ़सल उगाता हो; बटाई या किराए पर खेती करने वाले किसान भी चलते हैं
यह आपको ख़ुद देखना होगा
ये बातें हमारा टूल नहीं जाँच सकता। जब तक ये पक्की न हों, जवाब "शायद" रहेगा:
- आपके राज्य ने इस सीज़न के लिए आपकी फ़सल और आपका इलाक़ा नोटिफ़ाई किया हो (यहाँ देखें: pmfby.gov.in)
आवेदन और स्टेटस
- ऑनलाइन आवेदन: pmfby.gov.in
- ऑफ़लाइन: बैंक, PACS या CSC के ज़रिए; फ़सल लोन वाले किसान का बीमा बैंक करता है
- स्टेटस: pmfby.gov.in
- हेल्पलाइन: 14447
- फ़ीस: CSC से नाम लिखवाने पर किसान से कोई फ़ीस या चार्ज नहीं लगता। गाइडलाइन के मुताबिक़ CSC को यह अपने नोटिस बोर्ड पर लगाना होता है। प्रीमियम में किसान का हिस्सा अलग है
आवेदन ऊपर लिखी जगह पर ही करें। योजना चेक कोई आवेदन, फ़ीस, आधार या बैंक की जानकारी नहीं लेता।
ये डॉक्यूमेंट तैयार रखें
- आधार नंबर
- ज़मीन के रिकॉर्ड (रिकॉर्ड ऑफ़ राइट्स, लैंड पज़ेशन सर्टिफ़िकेट वग़ैरह)
- बटाई या किराए पर खेती करने वाले किसान के लिए करार या राज्य का मंज़ूर किया हुआ दूसरा डॉक्यूमेंट
- कौन-सी फ़सल बोई है या बोनी है, इसकी डिक्लेरेशन
- बैंक खाते की जानकारी (क्लेम का पैसा इसी खाते में आता है)। बिना फ़सल लोन वाले किसान के पास बैंक खाता और आधार नंबर या आधार एनरोलमेंट नंबर होना ज़रूरी है
- जहाँ राज्य माँगे, वहाँ बुवाई का सर्टिफ़िकेट। PIB के मुताबिक़ ज़मीन के कागज़, करार या बुवाई का सर्टिफ़िकेट, इनमें से क्या चलेगा, यह राज्य तय करता है
आवेदन के बाद
शिकायत
- कृषि रक्षक पोर्टल और हेल्पलाइन का टोल-फ़्री नंबर 14447 है। यहाँ शिकायत दर्ज करा सकते हैं और देख सकते हैं कि उसका क्या हुआ (PIB के मुताबिक़ जनवरी 2024 से)
- गाइडलाइन के मुताबिक़ हर ज़िले में शिकायत सुनने वाला अफ़सर होता है (आम तौर पर तहसीलदार या ज़िला कृषि अधिकारी), जो 7 दिन में जवाब देगा। संतुष्ट न हों तो ज़िला कलेक्टर की अगुवाई वाली ज़िला कमेटी में, फिर राज्य की कमेटी में जा सकते हैं
पैसा मिलता रहे, इसके लिए
- ओले, भूस्खलन, पानी भराव, बादल फटने या बिजली से आग जैसी स्थानीय आफ़त (जब राज्य ने यह कवर नोटिफ़ाई किया हो) और कटाई के बाद के नुक़सान में 72 घंटे के अंदर बताना होता है। गाइडलाइन के मुताबिक़ पहला तरीक़ा Crop Insurance App या सेंट्रल टोल-फ़्री नंबर है, उसके बाद बीमा कंपनी का टोल-फ़्री नंबर, बैंक या ज़िले के अफ़सर
छूटा हुआ पैसा
- गाइडलाइन के मुताबिक़ सही दावों का पैसा तय तारीख़ तक देना होता है। देर हुई तो पैसा बाक़ी रहने पर 12% सालाना ब्याज बनता है (राज्य की सब्सिडी जारी होने की शर्त पर)। मंज़ूर दावे 2 हफ़्ते में देने हैं
स्टेटस का मतलब
- दावे का पैसा तय होने की जानकारी हर किसान को नेशनल क्रॉप इंश्योरेंस पोर्टल (NCIP) से SMS में आती है (pmfby.gov.in)
शिकायत कहाँ करें
- सरकारी सर्विस से जुड़ी किसी भी बात की शिकायत केंद्र सरकार के CPGRAMS पोर्टल (pgportal.gov.in) पर 24 घंटे, हर दिन की जा सकती है। (pgportal.gov.in)
- केंद्र सरकार की योजना चलाने का काम राज्य सरकार करती हो, तब भी CPGRAMS की गाइडलाइन के मुताबिक़ उसकी शिकायत केंद्र का वही मंत्रालय देखता है, जिसकी वह योजना है।
- राज्य सरकार या UT के काम की शिकायत CPGRAMS पर डालें, तो वह उसी राज्य या UT की सरकार को भेज दी जाती है। CPGRAMS के मुताबिक़ आप अपनी शिकायत के बारे में उस राज्य सरकार से सीधे भी पूछ सकते हैं।
- शिकायत दर्ज होने पर एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है। CPGRAMS के मुताबिक़ उसी नंबर से शिकायत का स्टेटस देखा जा सकता है। (pgportal.gov.in)
धोखे से बचें
- गाइडलाइन के मुताबिक़ CSC किसान से फ़सल बीमा में नाम लिखने की कोई फ़ीस नहीं ले सकता। फ़ीस लेने वाले CSC पर सख़्त कार्रवाई होगी
- ऑनलाइन पैसे की ठगी हो जाए, तो RBI के मुताबिक़ तुरंत cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें या 1930 पर फ़ोन करें। (cybercrime.gov.in)
- पेमेंट रिलीज़ कराने या क्लेम पास कराने के नाम पर कोई पैसा माँगे, तो न दें। PFMS ख़ुद लिखता है कि वह पेमेंट प्रोसेस करने के लिए किसी से पैसा नहीं माँगता।
- पैसा पाने के लिए कहीं भी PIN या पासवर्ड डालने की ज़रूरत नहीं होती (RBI)। कोई ऐसा करने को कहे, तो रुकें: यह ठगी का तरीक़ा हो सकता है।
- कोई ऐप अनजान जगह से, या किसी अनजान आदमी के कहने पर डाउनलोड न करें। SMS, ईमेल, सोशल मीडिया या WhatsApp जैसे मैसेंजर पर आई ऐप की APK फ़ाइल या लिंक भी इंस्टॉल न करें (RBI)।
क्या करना होगा
- मालिक किसान ज़मीन का रिकॉर्ड दिखाए; बटाई या किराए वाला किसान करार या राज्य का मंज़ूर किया हुआ दूसरा डॉक्यूमेंट दिखाए
और ज़रूरी बातें
- किसान का प्रीमियम बीमा रक़म (सम इंश्योर्ड) का ज़्यादा से ज़्यादा 2% (खरीफ़), 1.5% (रबी) और 5% (कमर्शियल या बाग़वानी फ़सल) है; बाक़ी केंद्र और राज्य देते हैं
- बैंक से फ़सल लोन लेने वाले किसान का बीमा अपने आप हो जाता है; न चाहें तो कट-ऑफ़ तारीख़ से कम से कम 7 दिन पहले बैंक को लिखकर दें
- नाम लिखवाने की कट-ऑफ़ तारीख़ राज्य तय करता है; गाइडलाइन कहती है कि आम तौर पर खरीफ़ में 15 जुलाई और रबी में 15 दिसंबर से आगे नहीं
क्या बदला
- 17 अगस्त 2020: नई गाइडलाइन (ख़रीफ़ 2020 से): फ़सल लोन या KCC वाले किसानों के लिए भी बीमा अब ऐच्छिक है, यानी न चाहें तो मना कर सकते हैं। किसान का हिस्सा वही रहा: 2%, 1.5% और 5%। ख़रीफ़ 2020 में किस दिन से, यह नहीं लिखा, इसलिए गाइडलाइन की तारीख़ दी है (सोर्स)
अपने परिवार के लिए जाँचें: टूल आपके परिवार के लिए केंद्र की और आपके राज्य की योजनाएँ एक साथ जाँचता है।
सोर्स
-
Operational Guidelines, Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (Revamped), 17 August 2020
-
PIB Backgrounder: Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana - Affordable Crop Insurance for Every Farmer
-
PIB release (Lok Sabha reply): PMFBY provides comprehensive crop insurance to farmers at highly subsidized premium rates